गाजियाबाद घटना की प्राथमिकी पर ट्विटर इंडिया के एमडी को यूपी पुलिस का नोटिस; 7 दिनों के भीतर तलब किया गया

उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुरुवार को एक बड़े घटनाक्रम में एक बुजुर्ग व्यक्ति साथ हुई मारपीट की घटना के वायरल वीडियो के संबंध में ट्विटर के एमडी मनीष माहेश्वरी को नोटिस भेजा है।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस घटनाक्रम में एक बुजुर्ग व्यक्ति – अब्दुल समद के वायरल वीडियो के संबंध में ट्विटर के एमडी मनीष माहेश्वरी को नोटिस भेजा है। समस्या तब शुरू हुई जब कुछ प्रमुख हस्तियों ने ट्विटर पर दावा किया कि गाजियाबाद में मुस्लिम बुजुर्ग- अब्दुल समद सैफी के साथ न केवल जबरन दाढ़ी काटकर हमला किया गया था, बल्कि जय श्री राम जैसे नारे लगाने के लिए भी कहा गया था। कुछ का कहना है कि उन्हें ‘वंदे मातरम’ बोलने को भी मजबूर किया गया। घटना को सांप्रदायिक रंग देने की पूरी कोशिश की गयी।  पुलिस ने ट्विटर के एमडी मनीष माहेश्वरी को नोटिस मे जोर देकर कहा है कि ट्विटर और ट्विटर इंडिया ने विवादित ट्वीट्स को हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।

 

इस घटनाक्रम  में , AltNews के सह-संस्थापक मुहम्मद जुबैर, कांग्रेस नेताओं मस्कूर उस्मानी, सलमान निजामी और शमा मोहम्मद, पत्रकार सबा नकवी और राणा अयूब, समाचार प्रकाशन द वायर, ट्विटर और ट्विटर इंडिया के खिलाफ लोनी बॉर्डर पुलिस स्टेशन में 15 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। . उनके खिलाफ धारा 34 (सामान्य इरादा), 120-बी (आपराधिक साजिश), 153 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना), 153-ए (धर्म के आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295-ए (धार्मिक भावनाओं  को आहत करने के लिए जानबूझकर काम करना), और आईपीसी के 505 (सार्वजनिक शरारत करने वाले बयान) के तहत मामला दर्ज किया गया था। एक दिन बाद इस घटना को लेकर सपा नेता उम्मेद पहलवान इदरीसी पर प्राथमिकी दर्ज की गई।

उत्तर प्रदेश पुलिस के 17 जून के नोटिस के अनुसार, यह सीआरपीसी की धारा 160 के तहत जारी किया गया है, जो एक पुलिस अधिकारी को किसी भी व्यक्ति की उपस्थिति की मांग करने का अधिकार देता है जो संबंधित मामले के तथ्यों से परिचित प्रतीत होता है। माहेश्वरी को अपना बयान दर्ज कराने के लिए एक सप्ताह के भीतर लोनी बॉर्डर  पुलिस स्टेशन में पेश होने को कहा गया है।

घटनाक्रम में अब तक 5 गिरफ्तारियां

AIMIM सहित राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं की झड़ी के बीच, पुलिस ने मंगलवार को एक स्पष्टीकरण जारी किया। गाजियाबाद (ग्रामीण) एसपी इराज राजा के अनुसार, जांच मे यह पाया  गया था कि पीड़ित – अब्दुल समद न केवल अपने हमलावरों को जानता था, बल्कि उनके लिए ताबीज भी बनाता था। उन्होंने कहा कि अब्दुल समद सैफी के वादे के अनुसार ताबीज के सकारात्मक परिणाम नहीं आने के बाद आरोपियों ने उस पर इस तरह से हमला किया। उन्होंने इस मामले में कड़ी से कड़ी कार्रवाई का आश्वासन देते हुए कहा कि परवेश, कल्लू और आदिल को हिरासत में ले लिया गया है।

 

इस मामले में बुधवार को दो और आरोपी – इंतजार और सद्दाम उर्फ बौना को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने यह भी कहा है कि वो कुछ गलत जानकारी देने के लिए शिकायतकर्ता के खिलाफ भी कार्रवाई करेगी।

इस घटनाक्रम में प्रोपेगेंडा फैलाने वालों ने तरह-तरह के एंगल दिए हैं और पुलिस की शुरुआती पड़ताल को और आरोपियों के नाम को बड़ी चालाकी से छिपाया गया है।

आइए, अब इस पूरे घटनाक्रम को शुरू से समझें …

अब्दुल के ताबीज का सकारात्मक परिणाम नहीं आने पर हुई मारपीट

5 जून 2021 को गाजियाबाद में परवेश गुर्जर, आरिफ, आदिल, और कल्लू नाम के लड़कों ने अब्दुल समद पर हमला कर दिया और उसे बुरी तरह पीटा। आरोपियों ने बताया कि जो ताबीज अब्दुल ने उन्हें दिये थे उनका उनके परिवार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, जिसके बाद उन्होंने अब्दुल से बदला लेने की योजना बनाई।

अब्दुल समद के बेटे की शिकायत में विरोधाभासी बयान

कुछ मीडीया रिपोर्ट के अनुसार, अब्दुल समद के बड़े बेटे बब्बू सैफी ने गाजियाबाद के लोनी बॉर्डर पुलिस थाने में सपा नेता उमेद पहलवान इदरिसी की मदद से इस संदर्भ में शिकायत दर्ज करवाई कि उनके अब्बा को कुछ अंजान लोगों द्वारा उनकी  दरगाह से उठा कर एक अंजान जगह पर ले जाया गया और उनकी दाढ़ी काट दी गई। उन्हे मारा – पीटा गया, जबरन जय श्रीराम के नारे लगवाए गए और उन्हें पेशाब पीने को दिया गया।

ऑल्ट न्यूज के मोहम्मद जुबैर ने घटना को सांप्रदायिक रंग देने की पूरी कोशिश की

14 जून को ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने पीड़ित बुजुर्ग का वीडियो ट्वीट कर लिखा, “एक बुजुर्ग आदमी, सूफी अब्दुल समद सैफी पर गाजियाबाद के लोनी में 5 गुंडों ने हमला किया। उन्हें बंदूक की नोक पर मारा गया और जबरदस्ती उसकी दाढ़ी काट दी गई।”

 

एफआईआर के बाद मोहम्मद जुबैर ने 15 जून को इस वीडियो को डिलीट कर दिया…

 

 

द क्विंट ने तो ऐसे हिंदूफोबिक कार्टून भी छाप दिये थे जिन्हें बाद में उन्हें डिलीट करना पड़ा।

 

इस दौरान यूपी सरकार ने झूठ और प्रोपेगेंडा फैलाने  वालों पर कार्रवाई करनी शुरू कर दी।  जबरन जय श्रीराम के नारे लगाने जैसे कोई तथ्य  न होने के बावजूद  झूठ फैलाने  वालों – राणा अय्यूब, द वायर, सलमान निजामी, मकसूर उस्मानी, समा मोहम्मद और सबा नकवी  के विरुद्ध मुकदमे दर्ज किये गये है।  ट्विटर पर बिना प्रमाणिकता जाने वीडियो को शेयर होने देने और उस पर मैनिपुलेटेड मीडिया का टैग नहीं लगाने के आधार पर केस दर्ज किया गया है ।

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