बिहार के बांका में मिले नदी घाटी सभ्यता के अवशेष

जब छठ पर्व के दौरान सूर्य देवता को अर्घ्य देने के लिए घाटों की सफाई और निर्माण का कार्य चल रहा था, ग्रामीणों को बिहार के बांका जिले के भदरिया गांव के समीप चांदन नदी के बीच प्राचीन कालीन घरों की श्रृंखला के अवशेष मिले हैं।  इन अवशेषों में मिली दीवारों की चौड़ाई 20 से 30 फीट है।

यह श्रृंखला लगभग 50 फीट की दूरी तक नजर आती है और उससे आगे भी उसके होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं परंतु अभी वहां पर बालू भरा हुआ है और उसके ऊपर नदी का जल बह रहा है।

ग्रामीणों को इन अवशेषों के बीच एक मिट्टी का छोटा घड़ा भी मिला है, इसके अलावा एक मानव खोपड़ी के मिलने की भी बात कही जा रही है जो अज्ञानता वश गुम हो गई है।

 

 भदरिया गांव बिहार के बांका जिले के अमरपुर ब्लॉक में है जिसकी सीमा भागलपुर जिले से लगती है। भागलपुर जिले का ऐतिहासिक महत्व है। प्राचीन काल में यह जिला अंग महाजनपद के नाम से जाना जाता था तथा भारत के सोलह महाजनपदों में से एक था। इस महाजनपद की राजधानी चंपा थी जो अब चंपानगर के नाम से जाना जाता है। भदरिया गांव से चंपानगर की दूरी लगभग 25 किलोमीटर है।

भदरिया गांव के पास चांदन नदी की चौड़ाई 900 मीटर है, गांव की ओर वाले तट से 400 मीटर की दूरी पर यह प्राचीन कालीन सभ्यता अवशेष पाए गए हैं। इन अवशेषों में जो इंटे पाई गई हैं वे 15 इंच लंबी, 10 इंच चौड़ी और 2.5 इंच मोटी हैं, यहां से 1.3 इंच व्यास के मिट्टी के छोटे घड़े भी मिले हैं।

 

इतिहासकारों के अध्ययन और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह स्थल नदी घाटी सभ्यता मानी गई है। पूरे भारत में इससे पहले अब तक सिर्फ हरियाणा के राखीगढ़ी और गुजरात के लोथल में ऐसी सभ्यताओं के प्रमाण मिले हैं।

इस नदी घाटी सभ्यता के अधिक अध्ययन के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पटना सर्कल को जिला प्रशासन के द्वारा अनुरोध किया गया है।

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