पालघर साधु हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग का विरोध कर रही है महाराष्ट्र पुलिस

16 अप्रैल को महाराष्ट्र के पालघर में दो साधु और उनके वाहन चालक को उग्र भीड़ ने बेरहमी से पीट पीट कर मार डाला था। कुछ स्वतंत्र फेक्ट फाईंडिंग एजेंसियों के अनुसार एनसीपी के कनेक्शन की बात सामने आई है, फेक्ट फाईंडिंग टीम के अनुसार साधुओं की हत्या करने वाली भीड़ में एनसीपी के नेता काशीनाथ चौधरी, वामपंथी पार्टी सीपीएम के पंचायत सदस्य और उसके साथी विष्णु पात्रा, सुभाष भावर और धर्मा भावर शामिल थे।

 

 

साधुओं के हत्याकांड में राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंकाओं के बाद इस केस के वकील शशांक शेखर झा, पंचदशनाम जूना अखाड़ा के पीठ श्री और साधुओं के रिश्तेदारों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई और एन आई ए से जांच की मांग की याचिकाएं दायर की गई।
इस केस की सुनवाई 6 अगस्त को हुई थी और उसमें सर्वोच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र पुलिस से इस मामले में दायर चार्जशीट मांगी थी, व उन्होंने जिम्मेदार पुलिस कर्मियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की उसका भी ब्यौरा मांगा था।

महाराष्ट्र पुलिस ने इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दायर किया है जिसमें उन्होंने बताया है कि महाराष्ट्र राज्य सीआईडी ने जांच के बाद 126 आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है। और जिन पुलिसकर्मियों ने इस अपराध को रोकने में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में लापरवाही की, उनके खिलाफ भी कार्यवाही की गई है। हलफनामे में कहा गया है कि उन सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच की गई और जांच के बाद जो भी पुलिसकर्मी दोषी पाए गए हैं उन्हें बर्खास्त किया गया है। और कुछ को न्यूनतम आय की श्रेणी में डाल दिया गया है।

महाराष्ट्र पुलिस द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया है कि विभागीय जांच में दोषी पाए गए असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर आनंद राव शिवाजी कॉले को बर्खास्त कर दिया गया है, असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर रविंद्र दिनकर सालुंखे, हेड कांस्टेबल नरेश डौंडी को कंपलसरी रिटायरमेंट दिया गया है, इसके अलावा अन्य 15 दोषी पुलिसकर्मियों को दो-तीन साल के लिए न्यूनतम आय की सजा दी गई है।

महाराष्ट्र पुलिस ने दायर किए अपने हलफनामे में इस केस में सीबीआई जांच और एनआईए की जांच की उठ रही मांगों का विरोध किया है। महाराष्ट्र पुलिस का कहना है कि इस प्रकार की सभी याचिकाएं खारिज कर याचिकाकर्ताओं पर जुर्माना लगाना चाहिए।

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