पूर्वोत्तर दिल्ली में फरवरी 2020 के दंगों के पीछे गहरी साजिश सामने आ रही है।

दिल्ली पुलिस की क्राईम ब्रांच ने मंगलवार को दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए हिंदू-विरोधी दंगों में अपनी चार्जशीट (आरोप-पत्र) दायर की। दंगों के पीछे गहरी साजिश के हैरान कर देने वाले चिंताजनक विवरण सामने आए हैं। हिंदू-विरोधी दंगों में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन की भूमिका स्पष्ट रूप से उजागर हो गई है। पूर्व जेएनयू छात्र उमर खालिद का नाम भी चार्जशीट में प्रमुख अभियुक्तों मे है। इसके साथ ही,चरम वामपंथी संगठन पिंजरा टोड़ के खिलाफ भी जाफराबाद दंगों में उनकी भूमिका के लिए आरोप पत्र दायर किया गया है।

23 मई को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने नताशा नरवाल और देवांगना कलिता नाम की दो महिलाओं को पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार किया था। दोनों महिलाएं पिंजरा टोड़ की संस्थापक सदस्य हैं, जिसे 2015 में स्थापित किया गया था।
दिल्ली पुलिस के अनुसार दोनों महिलाएं-नताशा और देवांगना जाफराबाद में दंगे भड़काने की साजिश रचने में शामिल थीं। नताशा के खिलाफ फरवरी में पूर्वोत्तर दिल्ली में हिंदू-विरोधी सांप्रदायिक दंगों को उकसाने में उनकी भूमिका के लिए कड़े गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत केस दर्ज किया गया था।

चार्जशीट में कहा गया है कि इंटेलिजेंस ब्यूरो के कांस्टेबल अंकित शर्मा की हत्या के पीछे गहरी साजिश थी, ताहिर हुसैन के नेतृत्व वाली भीड़ ने उसे एक साजिश के तहत निशाना बनाया । चार्जशीट के अनुसार, अंकित शर्मा की हत्या 25 फरवरी को पूर्व AAP पार्षद के घर के बाहर खजूरी खास में की गई थी। डॉक्टरों के अनुसार मृतक अंकित शर्मा के शरीर पर 51 गहरे घाव थे, जो किसी धारदार हथयार से किये गए थे। एक गवाह ने अपने फोन पर घटनाओं की पूरी श्रृंखला रिकार्ड की जिसमें एक भीड़ को एक नाले में उसकी लाश को डंप करते देखा जा सकता है। अगली सुबह उसका शव बरामद किया गया। जिस चाकू से उसकी हत्या की गई थी, वह बरामद हुआ है और हत्यारे के खून से सने कपड़े भी मिले हैं।

चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि ताहिर हुसैन ने जनवरी के दूसरे सप्ताह में कुछ फर्जी कंपनियों को 1.1 करोड़ रुपये ट्रान्सफर किये जो बाद में नकद में वापस ले लिए गए और दंगों की तैयारी में  लगाए गये। जांच में कहा गया है कि ताहिर हुसैन ने मीनू फेब्रिकेशन और एसपी फाइनेंशियल सर्विसेज के खातों में 92 लाख, शो इम्पैक्ट प्राइवेट लिमिटेड को 20 लाख रुपये और युधवी इम्पेक्स को 20 लाख रुपये दिए।

उमर खालिद की भूमिका के बारे, आरोप-पत्र में कहा गया है कि उन्होंने पूर्व AAP नेता ताहिर हुसैन से कहा कि “ट्रम्प की भारत यात्रा के दौरान कुछ बड़े / दंगों के लिए तैयार रहें”, और “वह और अन्य पी एफ आई सदस्य उसकी आर्थिक रूप से मदद करेंगे ”।

आरोप पत्र में कहा गया है, “हुसैन ने दावा किया कि सैफी ने उन्हें तैयारियों के लिए पैसे दिए और उन्होंने, उनके स्वामित्व वाली कंपनियों के खाते से, जनवरी के दूसरे सप्ताह में 1.10 करोड़ रुपये फर्जी कंपनियों को हस्तांतरित किए। बाद में उन्होंने लेनदेन की एक श्रृंखला के माध्यम से नकद राशि प्राप्त की और अपनी तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने  सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों को नकदी भी वितरित की।

ताहिर हुसैन के सह-अभियुक्त और उनके इलाके के कई अन्य लोगों ने भी अपने अन्य समर्थकों से कहा कि वे एक बड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहें। चार्जशीट में कहा गया है कि ताहिर हुसैन ने खजूरी खास पुलिस स्टेशन से अपनी लाइसेंसी पिस्तौल भी छुड़ा ली थी, जब उन्हें पता चला कि कुछ लोग उन्हें सबक सिखाने के लिए पास में सीएए समर्थक प्रदर्शन आयोजित कर रहे हैं।

चार्जशीट के अनुसार ताहिर हुसैन सहित पंद्रह लोगों ने दिल्ली के खजूरी खास में ताहिर हुसैन के घर के बाहर हुए दंगों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके छोटे भाई, शाह आलम को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। ताहिर हुसैन की लाइसेंसी पिस्टल, जिसका इस्तेमाल उन्होंने दंगों के दौरान किया था, पुलिस ने जांच के दौरान बरामद कर ली है।

राजधानी स्कूल मामले में पिछले बुधवार को एक और चार्जशीट (आरोप-पत्र) दायर किया गया। दिल्ली के मुस्तफाबाद के शिव विहार में राजधानी स्कूल के परिसर के बाहर 24 फरवरी को हुए दंगों में 5 मार्च को एफआईआर दर्ज की गई थी। प्राथमिकी डीआरपी कॉन्वेंट स्कूल के मालिक और प्रबंधक द्वारा दर्ज की गई शिकायत पर दर्ज की गई थी, जो राजधानी स्कूल के बगल में है। चार्जशीट में कहा गया है कि 24 फरवरी को, मुस्लिम परिवारों के कई बच्चों ने अपने माता-पिता के साथ जल्दी स्कूल छोड़ दिया था, जो दर्शाता है कि दंगा पूर्व नियोजित था।  राजधानी स्कूल की छत पर रस्सी, कांच की बोतलों की उपस्थिति, और लोहे की गुलेल, एक सुनियोजित रणनीति के क्रियान्वयन की ओर इशारा करती है।

यह भी आरोप है कि दंगाइयों ने डीआरपी कॉन्वेंट स्कूल से कंप्यूटर और अन्य महंगी वस्तुए  लूट ली। भीड़ ने अनिल स्वीट्स की इमारत को भी जला दिया, जो कि स्कूल के बिल्कुल विपरीत था। अनिल स्वीट्स के एक कर्मचारी दिलबर नेगी बिल्डिंग के अंदर फंस गए और मारे गए। उसका शव पुलिस को बाद में मिला।
मामले में अठारह व्यक्तियों के साथ राजधानी स्कूल के मालिक फैसल फारूक को गिरफ्तार किया गया था। जांच में पता चला कि फैसल फारूक ने राजधानी स्कूल क्षेत्र में और उसके आसपास दंगों को अंजाम देने की योजना बनाई थी। गवाहों के बयान से पता चला की उनके निर्देश पर, डीआरपी कॉन्वेंट स्कूल और अनिल स्वीट्स की दोनों इमारतों में आग लगा दी गई। उनकी कॉल डिटेल्स से उनके लिंक पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया, पिंजरा टोड़ ग्रुप, जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी, हजरत निजामुद्दीन मरकज और कुछ अन्य मुस्लिम मौलवियों के प्रमुख सदस्यों के साथ जुड़े पाए गए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *