सावधान रहें – झूठ का बाजार गर्म है

एक तरफ तो हमारा देश कोरोना जैसी महामारी से त्रस्त है और दूसरी ओर अपने निजी स्वार्थ को साधने हेतु झूठ फैलाने वाले राजनेताओं और विक्षिप्त पत्रकारों  के कुकत्य से त्रस्त है।

 भारतीय रेलवे ने देशभर में श्रमिकों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई, कुछ ट्रेनों के रूट सामान्य रूटों से बदल दिए गए क्योंकि श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का उद्देश्य श्रमिकों को उनके गंतव्य तक पहुंचाना है इसलिए रूट बदले गए ताकि कम समय में और ट्रेफिक कंजेशन से बचते हुए उद्देश्य को पूरा किया जा सके। पर यहां भी कुछ विक्षिप्त राजनेताओं और पत्रकारों ने झूठ परोसना शुरु कर दिया।

एक ऐसा ही झूठ दैनिक भास्कर ने 26 मई के अपने प्रकाशन में परोसा की ट्रेने 9 दिन लेट पहुंच रही हैं और ट्रेनें अपने रास्ते से भटक गई हैं। इस संदर्भ में रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी ने भास्कर प्रकाशन के संपादक को लिखित चेतावनी भी दी है कि इस प्रकार के भ्रामक और सनसनीखेज झूठ परोसने से पहले उन्हें तथ्यों की पुष्टि कर लेनी चाहिए।

 

अब जब झूठ का बाजार गर्म हुआ ही है तो एनडीटीवी के रवीश कुमार जैसे रेमन मैग्सेसे पत्रकार जो अर्धसत्य और असत्य पर अपनी दुकानदारी चलाते हैं भी कहां पीछे रहने वाले थे। उन्होंने भी प्राइमटाइम कर दिया और इस झूठ को और बढ़ा चढ़ाकर परोस दिया की ट्रेनें रास्ते से भटक रही हैं और अपने गंतव्य तक पहुंचने में कई दिन का समय  ले रही हैं।

खैर रवीश कुमार से कोई खास उम्मीद है भी नहीं क्योंकि पिछले 5  वर्षों में उन्होंने कभी भारतीय आर्मी के ऊपर झूठ परोसा, कभी वर्ल्ड बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट पौल रोमर के संबंध में झूठ बोला, तो कभी दिल्ली दंगों में पुलिस के ऊपर बंदूक तानने वाले एक मुस्लिम शाहरुख पठान को अनुराग मिश्रा साबित करने की भरसक कोशिश की। और हाल ही में यह झूठ भी परोस दिया कि चीनी सेना ने भारतीय सेना के कुछ जवान बंदी बना लिए हैं। एनडीटीवी, प्रिंट और द वायर जैसे वामपंथी समर्थित संस्थानों में तो झूठ परोसने की एक होड़ सी लगी हुई है पिछले कुछ वर्षों से। पत्रकारिता को भी इन संकीर्ण मानसिकता वाले पत्रकारों ने अपने निजी स्वार्थों और अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए एक दलाली का व्यवसाय बना दिया है।

 पिछले कुछ समय से मोदी विरोध में यह लोग इतना गिर गए हैं की नित्य नई झूठी खबरें परोस रहते हैं ताकि देश में वैमनस्य की भावना बढे., लोग सड़कों पर उतरें, और अराजकता फैले और किसी तरह से यह सरकार गिर जाए। पर शायद ये भूल गए हैं कि भारत में किसी राजा की सरकार नहीं है जिसे किसी उग्र जन आंदोलन के द्वारा तख्तापलट किया जा सकता है। ये विक्षिप्त और संकीर्ण मानसिकता वाले पत्रकार और राजनेता शायद यह भूल गए हैं कि देश में जो सरकार इस समय है उसे इस देश की जनता ने ही बहुमत देकर स्थापित किया है। अतः उन्हें सकारात्मक कार्य करने चाहिए और अगले चुनाव का इंतजार करना चाहिए, जब वे अपनी बेहतर छवि प्रस्तुत कर लोगों से मतदान की उम्मीद कर सकते हैं। पर झूठ फैला कर समाज में वैमनस्य पैदा करके देश में अराजकता पैदा करने की यह जो इन्होंने हरकतें की हैं इससे इन्हे बाज आना चाहिए ।

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