सनातन धर्म या हिंदू धर्म – क्या है सही?

यह प्रश्न बार-बार पूछा जाता है की सनातन धर्म क्या है और हिंदू धर्म क्या है ?  इस लेख में इस विषय से संबंधित संशय को दूर करने की कोशिश कर रहा हूं।

सनातन धर्म शाश्वत धर्म है, वेदों और शास्त्रों के अनुसार आचार -व्यवहार और सत्कर्म ही सनातन धर्म है।

सत्यं वद धर्मं चर।
अर्थात: सत्य बोलो और धर्म का पालन करो।
यही है सनातन धर्म का सार।

 

हिंदू कोई धर्म ही नही है। हिंदू एक ईरानी शब्द है और इसका अर्थ है भारत में रहने वाले लोग।

हिंदू शब्द की उत्पत्ति भारत के उत्तर पश्चिम में बहने वाली सिंधु नदी से संबंधित है। विदेशी आक्रांता और अन्य विदेशी भारत में उत्तर पश्चिम दिशा से ही आए और उन्होंने जिस देश को देखा वह सिंधु का देश था। ईरान (फारस) के साथ भारत के बहुत प्राचीन समय से संबंध थे। और ईरानी सिंधु को हिंदू कहते थे। इस प्रकार हिंदू शब्द की उत्पत्ति हिंद देश के निवासियों के रूप में हुई। भारत में रहने वाला हर व्यक्ति चाहे वह किसी भी धर्म या पंथ का हो हिंदू कहलाता था। अत: हिंदू कोई धर्म नहीं है इसलिए हिंदू धर्म कहना छोड़ दीजिए, सनातन धर्म ही हमारा मूल है।

अंग्रेजों ने और फिर हमारे संविधान बनाने वालों ने सनातन धर्म के अनुयायियों को हिंदू के नाम से चिन्हित कर दिया जोकि गलत था। अब आप इस गलती को दोहराना छोड़ दीजिए।

यदि आप सनातन धर्म के बारे में जानना चाहते हैं तो आपको सनातन धर्म के धार्मिक साहित्य की जानकारी होना बहुत आवश्यक है।
आइये सनातन धर्म के साहित्य और ग्रंथो को जानने और समझने का प्रयत्न करें ।

सनातन धर्म के कई पवित्र ग्रन्थ है जिन्हे दो भागो में बांटा गया है – श्रुति और स्मृति ।

श्रुति सनातन धर्म के सर्वोच्च ग्रंथ हैं और सनातन काल से ही अपरिवर्तनीय हैं । श्रुति सनातन धर्म के सभी ग्रंथो के आधार माने जाते हैं। श्रुतियों का ज्ञान होने के बाद एक मनुष्य को किसी और ग्रंथ को पढ़ने की आवश्यकता नहीं रहती ।

श्रुति का शाब्दिक अर्थ है सुना हुआ, यानि ईश्वर की वाणी जो प्राचीन काल में ऋषियों द्वारा सुनी गई थी ।

श्रुतिया वो ज्ञान है जिसका समाधी की सर्वश्रेष्ठ अवस्था मे ज्ञान होना माना गया है, ईश्वरीय कृपा से अनायास ही सब ज्ञान हो जाना माना गया है ।
श्रुति के अन्तर्गत वेद, सूत्र व उपनिषद् आते हैं।

श्रुति यथार्थ पीढ़ी दर पीढ़ी सुने हुए ज्ञान और अनुभवों को याद करके रखना ही स्मृति है । कालांतर में जब ज्ञान को लिपिबद्ध करने की प्रथा आरम्भ हो गयी, तो पीढ़ियों से सुने हुए ज्ञान को याद कर लिपिबद्ध कर दिया गया, और यही लिपिबद्ध रचनाये स्मृति कहलायीं ।

प्रमुख स्मृतिग्रन्थ हैं:- इतिहास–रामायण और महाभारत, पुराण(18), मनुस्मृति, धर्मशास्त्र और धर्मसूत्र, आगम शास्त्र।

स्मृतियों को धर्मशास्त्र भी कहा जाता है। प्रमुख रूप से 18 स्मृतियां मानी गई है। स्मृतियों को प्रमुख ऋषियों और राजा मनु ने लिखा है।

भगवत गीता भी श्रुति है, यह भगवान श्री कृष्ण द्वारा कही गयी है ।

महाभारत को पंचमवेद माना गया है।

अगर श्रुति और स्मृति में कोई विवाद होता है तो श्रुति ही मान्य होगी।

 

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