तीन बच्चियों के पिता, गौ रक्षक – गोपाल की गौ तस्करों ने की हत्या

गौ रक्षक समिति के सदस्य – गोपाल को हरियाणा के पलवल जिले में गौ तस्करों ने मार डाला है। हरियाणा सरकार ने कहा है कि हत्यारों को बख्शा नहीं जाएगा। गोपाल, जो तीन बच्चों का पिता और परिवार के लिए एकमात्र रोटी कमाने वाला था, ने देखा कि गाय तस्कर चोरी की गायों को ले जा रहे थे। उन्होंने वाहन का पीछा किया और गाय तस्करों को रोकने के लिए  गौ रक्षक दल के सदस्यों को फोन करके उन्हें घटना के बारे में सूचित करने का प्रयास किया। लेकिन गौ तस्करों ने गोपाल की गोली मारकर हत्या कर दी। वह तीन लड़कियों का पिता है और अब तक परिवार के लिए हरियाणा सरकार से कोई मदद नहीं मिली है।

 

 

सोमवार 29 जुलाई को लगभग 7 बजे, गोपाल को स्थानीय स्रोतों से कई गायों के चोरी होने और अवैध रूप से एक वैन में ले जाने की जानकारी मिली। उन्होंने तुरंत गौ रक्षक दल के अन्य सदस्यों को सूचित किया और वाहन को ट्रैक करने के लिए स्थान पर पहुंचे। उन्होंने पलवल हाईवे पर यात्रा कर रही वैन को ट्रेस किया और उन्हें रुकने को कहा। हालांकि, तस्कर रुके नहीं और दूर हट गए। गोपाल ने उनका पीछा करना जारी रखा तब वाहन के अंदर से एक तस्कर ने उसे गोली मार दी।

घटनास्थल पर पहुंचे अन्य सदस्य गोपाल को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले गए जहां उसने दम तोड़ दिया। गांव में स्थिति तनावपूर्ण है, पुलिस वाहन और अपराधियों की तलाश कर रही है। स्थानीय रिपोर्टों में कहा गया है कि इस क्षेत्र में गौ तस्करी में भारी वृद्धि हुई है, जिसके कारण गौ रक्षक भी सतर्क हैं।

देश में स्थिति बड़ी ही चिंताजनक है। यहां पर एक चोर जिसकी लोगों द्वारा पीटे जाने पर मृत्यु हो जाती है, पर बहुत हो हल्ला किया जाता है।  फिल्मी हस्तियों द्वारा प्रधानमंत्री को पत्र लिखे जाते हैं, ट्विटर पर कई हस्तियां विलाप करती नजर आती हैं।  पर वही जब कोई हिंदू मारा जाता है और खासतौर पर जब मारने वाले मुस्लिम हो तो इन सभी हस्तियों को यह लिंचिंग नजर नहीं आती। वे कोई विरोध प्रकट नहीं करते हैं क्योंकि शायद उनके ज्ञान और शब्दकोश के अनुसार हिंदू इंसान ही नहीं है। वे केवल मुस्लिमों की हत्या पर रोष प्रकट करते हैं। इस प्रकार की स्थिति केवल देश में वैमनस्य को और बढ़ाएगी।

मानवता और तार्किक आधार पर इंसान को निष्पक्ष रूप से अपनी बात सामने रखनी चाहिए और रोष प्रकट करने में भी निष्पक्षता रखनी चाहिए फिर चाहे हत्या किसी मुस्लिम की हो, हिंदू की हुई हो या कीसी भी धर्म के इंसान की, आखिर एक इंसान की हत्या हुई है तो फिर यह लोग धर्म देखकर रोष प्रकट क्यों करते हैं? और स्वयं को बुद्धिजीवी भी कहते हैं, ऐसे लोग ना तो बुद्धिमान हैं और ना ही सजीव।

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