पहलु खान एक गौ-तस्कर था

पहलु खान जो अलवर में दो साल पहले “गौ रक्षकों” द्वारा कथित तौर पर मारा गया था, उसे राजस्थान पुलिस द्वारा “गौ-तस्कर” के रूप में आरोपित किया गया है। 2017 में राज्य में भाजपा के सत्ता में होने के बाद से राजस्थान पुलिस को गलत चित्रित किया गया, बिकी हुई लुटियनस मिडिया ने खूब झूट फैलाया। लगभग सभी राजनीतिक दल मुसलिम वोटों के लालच में एक “गौ-तस्कर” का पक्ष लेते नजर आए। अब कांग्रेस राज्य में शासन कर रही है। पूर्वाग्रह कारक भाप बन कर उड़ गया है।

 

गवाहों में से एक पहलु खान के बेटे इरशाद थे। पुलिस को बाद में पता चला कि “गोलीबारी” प्रकरण फर्जी था। “गवाहों पर कोई गोलीबारी नहीं हुई और शिकायत नकली थी। गोलीबारी का कोई परिस्थितिजन्य साक्ष्य नहीं था और न ही ऐसा कोई वाहन, जैसा कि शिकायतकर्ता द्वारा वर्णित है सीसीटीवी फुटेज में देखा गया है, ”पुलिस ने कहा।

अलवर गौ-तस्करों की मांद है, जिनकी संख्या 500 से अधिक है। सड़कों और घरों से गौ को उठाया जाता है, वाहनों में भर दिया जाता है और ज्यादातर मेवात (हरियाणा) में मारे जाते हैं, गौ-तस्करों में ज्यादातर मेव मुस्लिम शामिल हैं। “गौ-रक्षक” कार्यकर्ता हैं, वे पुलिस को गौ-तस्करों के खिलाफ टिप देते हैं। वास्तव में, पुलिस गौ-तस्करों के खिलाफ छापेमारी में उनसे साथ देने के लिए कहती है।

एक दशक से अधिक समय से अलवर वासी अपने पशुओं पर रात में निगरानी रख रहे हैं, क्योंकि यह क्षेत्र गौ-तस्करों का शिकार है। कई ऐसे किसानों के उदाहरण हैं जिनके पास एक बार 10 गायें थीं, अब एक भी नहीं बची है। ऐसे ही एक लूटे गए किसान के बेटे का कहना है: “हमने अपने मवेशी खो दिए और एक नया शब्द सीख लिया- डकैत। इसलिए यदि आप एक चोर का विरोध करते हैं, तो वे कहेंगे कि भीड़ ने मार दिया। ”
अलवर में जिन किसानों के पास गाय हैं उनको  गौ-तस्करों द्वारा मार दिया जाता है। फिर भी, एक गौ-तस्कर – पहलु खान को “ग्रेटर नोएडा में एक फ्लैट और लाखों रुपयों से सम्मानित किया जाता है।” जो लोग अपने मवेशी खो देते हैं उन्हे बदले में मिलते हैं : “गौ-रक्षकों और लिंचरों” का टैग। प्रशासन को गाय-तस्करी के खतरे को समझने की आवश्यकता है।
आप बिकी हुई लुटियनस मिडिया द्पवारा पक्षपाती रिपोर्टिंग से हुए नुकसान की कल्पना भी नही कर सकते। असदुद्दीन ओवैसी ने लाखों मुसलमानों में डर पैदा करने के लिए झूट फैलाया। उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती भी असदुद्दीन ओवैसी के सुर में सुर मिलाने लगे। शबाना आज़मी तख्तियों के साथ सड़कों पर उतरती हैं, जावेद अख्तर, कमल हासन, आमिर खान, स्वरा भास्कर, प्रकाश राज सभी इस झूटे ऐजेंडे को आगे बढ़ाते हैं। नसीरुद्दीन शाह को अचानक इस देश में डर लगने लगता है। यह सब संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा भारत में “धार्मिक उत्पीड़न की रिपोर्ट” को आकार देता है। न्यूयॉर्क टाइम्स, टाइम और वेस्टर्न प्रेस के अन्य प्रकाशनों में मोदी के भारत में असहिष्णुता पर लेख छापे जाते हैं। इस तरह पूरे विश्व मे भारत की छवि बिगाड़ने का दुष्कर्म किया जा रहा है।

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