बंगाल में डॉक्टर को पीट कर घायल करने के विरोध में देशभर में डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन

पिछले सोमवार की रात कोलकाता के नीलरतन सरकार अस्पताल में इलाज के दौरान एक 75 वर्षीय मुसलमान मोहम्मद शाहिद की मृत्यु हो गई जिसके बाद उसके परिजन और अन्य मुसलमानों ने मिलकर दो डॉक्टरों को बेरहमी से पीट दिया जिससे एक डॉक्टर परिवाह मुखर्जी की हालत गंभीर है ।

डॉक्टरों पर जानलेवा हमले के बाद पूरे बंगाल में डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दीया और इस्तीफे देने शुरू कर दिए। कोलकाता के आरजी कर अस्पताल के 16 डॉक्टरों और उत्तरी बंगाल मेडिकल कॉलेज के दो डॉक्टरों  ने इस्तीफा दे दिया है । पश्चिम बंगाल के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत अन्य 92 डॉक्टर ने भी इस्तीफे की पेशकश कर दी है।

आईएमए के आव्हान पर भारत के अन्य राज्यों के डॉक्टरों ने भी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है आईएमए में तीन लाख से अधिक डॉक्टर सदस्य हैं।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि बाहरी लोग डॉक्टरों को आंदोलन के लिए उकसा रहे हैं और उन्होंने कोलकाता हाई कोर्ट में डॉक्टरों की हड़ताल खत्म करने के लिए अंतरिम आदेश देने के लिए भी अर्जी लगाई थी। पर अदालत ने राज्य सरकार को फटकार लगाई है और 1 हफ्ते में जवाब मांगा है।

यह बेहद ही निराशाजनक और चिंता योग्य विषय है कि ममता बनर्जी ने बंगाल में एक समुदाय विशेष को खुश करने के लिए समाज के बाकी सभी वर्गों को ताक पर रख दिया है उनकी सभी पॉलिसी केवल मुस्लिम समाज को खुश करने के लिए होती हैं। इस केस में भी वे आरोपी रोहिंग्या मुसलमानों – जिन्होंने डॉक्टर को पीट-पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया, पर कार्रवाई करने की बजाए डॉक्टरों पर ही दबाव बना रहीं हैं।

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