परम सत्य!

बाइबिल में जीसस क्राइस्ट ने कहा कि वे भगवान के पुत्र है।
इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद ने कहा कि वे भगवान के संदेश वाहक हैं।
बाइबिल और कुरान भगवान के रूप में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बता पाते।
तो कौन है ये भगवान जिसका बेटा जीसस अपने आप को कहते हैं और मोहम्मद अपने आप को उनका संदेशवाहक बताते हैं।
इसका जवाब हम आपको देते हैं कि भगवान कौन है।
श्रीमद्भगवद्गीता जो भगवान श्री कृष्ण के मुखारविंद से निकली है इस प्रश्न का जवाब बिल्कुल साफ साफ देती है।

 

 

श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 7 के श्लोक 6 में भगवान श्री कृष्ण ने कहां है कि वे ही इस सृष्टि को बनाने वाले, चलाने वाले, और नष्ट करने वाले हैं।
भौतिक आध्यात्मिक जो भी इस सृष्टि में है उन्हीं से है।
वे ही हैं- भगवान, परमात्मा, गॉड, या जिस भी नाम से आप उन्हें पूजना चाहे, पुकारना चाहें।

यही परम सत्य है ।

श्रीमद्भगवद्गीता
अध्याय 7 : भगवद्ज्ञान
श्लोक 7 . 6

एतद्योनीनि भूतानि सर्वाणीत्युपधारय |
अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा || ६ ||

एतत् – ये दोनों शक्तियाँ; योनीनि – जिनके जन्म के स्त्रोत, योनियाँ; भूतानि – प्रत्येक सृष्ट पदार्थ; सर्वाणि – सारे; इति – इस प्रकार; उपधारय – जानो; अहम् – मैं; कृत्स्नस्य – सम्पूर्ण; जगतः – जगत का; प्रभवः – उत्पत्ति का करण; प्रलयः – प्रलय, संहार; तथा – और |

तात्पर्य

जितनी वस्तुएँ विद्यमान हैं, वे पदार्थ तथा आत्मा के प्रतिफल हैं | आत्मा सृष्टि का मूल क्षेत्र है और पदार्थ आत्मा द्वारा उत्पन्न किया जाता है | भौतिक विकास की किसी भी अवस्था में आत्मा की उत्पत्ति नहीं होती, अपितु यह भौतिक जगत् आध्यात्मिक शक्ति के आधार पर ही प्रकट होता है | इस भौतिक शरीर का इसीलिए विकास हुआ क्योंकि इसके भीतर आत्मा उपस्थित है | एक बालक धीरे-धीरे बढ़कर कुमार तथा अन्त में युवा बन जाता है, क्योंकि उसके भीतर आत्मा उपस्थित है | इसी प्रकार इस विराट ब्रह्माण्ड की समग्र सृष्टि का विकास परमात्मा विष्णु (श्री कृष्ण) की उपस्थिति के कारण होता है | अतः आत्मा तथा पदार्थ मूलतः भगवान् की दो शक्तियाँ हैं, जिनके संयोग से विराट ब्रह्माण्ड प्रकट होता है | अतः भगवान् कृष्ण ही सभी वस्तुओं के आदि कारण हैं | भगवान् कृष्ण का अंश रूप जीवात्मा भले ही किसी गगनचुम्बी प्रासाद या किसी महान कारखाने या किसी महानगर का निर्माता हो सकता है, किन्तु वह विराट ब्रह्माण्ड का कारण नहीं हो सकता | इस विराट ब्रह्माण्ड का स्त्रष्टा भी विराट आत्मा या परमात्मा है | और परमेश्र्वर कृष्ण विराट तथा लघु दोनों ही आत्माओं के कारण हैं | अतः वे समस्त कारणों के कारण है |

4 thoughts on “परम सत्य!

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