नोटबंदी के बाद अब नोटमंदी


पिछले 2 दिनों से देश कई हिस्सों से में ATM में कैश ना होने की से खबरें आ रही है। नोटबंदी के बाद लगभग 1 साल से इस तरह की कोई कमी नहीं आई। अचानक यह नोटों की किल्लत या यूं कहें नोटमंदी बेहद संदेहपूर्ण है।

कर्नाटक चुनावों की वजह से विपक्षी पार्टियां नोट जमा कर रहीं हैं ताकि एक आर्टिफिशियल नोटमंदी देश में हो सके। जिससे जनता परेशान होकर झुंझलाकर BJP की बजाय विपक्षी पार्टियों को वोट कर दें। यह बेहद सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है। WhatsApp और अन्य सोशल मीडिया के जरिए आम जनता में पैनिक क्रिएट किया जा रहा है। जिससे लोग घबराकर ATM और बैंकों में पैसे निकालने के लिए जमा हो रहे हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया है की 500 के नोटों की सप्लाई 5 गुना बढ़ा दी गई है और अगले तीन-चार दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी, पर राजनीति का गिरता स्तर और इस तरह के हथकंडे वाकई खतरनाक है। सत्ता की भूख में राजनीतिक पार्टियां कितना नीचे गिर सकती हैं, यह सोच कर ही मन व्याकुल हो जाता है।

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