ऋग वेद से पाई π  का मूल्य

वेदों में अथाह ज्ञान है।  मुख्यतः  ऋग्वेद में  बहुत से ऐसे वैज्ञानिक तथ्य हैं  जिन्हें  आधुनिक विज्ञान  बहुत  समय के पश्चात खोज पाया। आइए जानते हैं  हमारे वैदिक विज्ञान को  और ऋग्वेद के कुछ वैज्ञानिक तथ्यों को।

ऋग वेद से पाई π  का मूल्य

ऋगवेद के दसवे मंडल में एक श्लोक है जिस से 28 अंको तक पाई का सही मान ज्ञात होता है ।

संस्कृत में कुछ संख्यात्मक कोड होते है जिनका उपयोग श्लोको में किया जाता है । जो इस प्रकार हैं

कादि नव

तादि नव

पादि पञ्चक

यद्यशष्टक

क्षः शून्यंम

अथार्थ:

कादि नव आरम्भ होता है क से और 9 अक्षरों के अनुक्रम का प्रतिनिधित्व करता है:

क – 1, ख – 2, ग- 3, घ -4, ड.-5, च-6, छ-7,  ज-8,  झ-9,

तादि नव  आरम्भ होता है त से और 9 अक्षरों के अनुक्रम का प्रतिनिधित्व करता है:

ट- 1, ठ- 2, ड- 3, ढ- 4, ण- 5, त- 6, थ- 7,  द- 8,  ध- 9,

पादि पञ्चक १ से ५ अंको का प्रतिनिधित्व करता है,  प से आरम्भ होकर :

प- 1, फ- 2, ब- 3, भ- 4, म- 5,

यद्यशष्टक, य से आरम्भ होता है और ८ अक्षरों के अनुक्रम का प्रतिनिधित्व करता है:

य- 1, र- 2, ल- 3, व- 4, श- 5, ष- 6, स- 8, ह- 9

क्षः शून्यंम अथार्थ :

क्ष – 0

इस कोड पद्धति पर आधारित कई वैदिक श्लोक हैं जो गणित के सूत्र हैं।

उदाहरण के लिए पाई का मान ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित श्लोक है:

गोपीभाग्य मधुव्रातः श्रुंगशोदधि संधिगः।

खलजीवितखाताव गलहाला रसंधरः ।।

ग-3, प-1, भ- 4, य- 1, म- 5, ध- 9, र-2, थ-6, इस प्रकार ऊपर बताए कोड पद्धति का उपयोग कर पाई का मान क्या होता है:

3.1415926535897932384626433832792…. 32 दशमलव तक।

इस श्लोक के तीन अर्थ है। पहला भगवान शिव की स्तुति, दूसरा भगवान कृष्ण की स्तुति और तीसरा पाई का मान 32 दशमलव तक।

3 thoughts on “ऋग वेद से पाई π  का मूल्य

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