चार साहिबजादों की शहादत शामिल होगी एनसीईआरटी के नए सिलेबस में


पाश्चात्य सभ्यता के असर में हम अपने इतिहास को भुलाते जा रहे हैं। हर ओर क्रिसमस की धूम दिखाई दे रही है। जबकि इन ही दिनों पंजाब में शहीदी पूरब मनाया जाता है। और यह बड़ी ही शर्म की बात है कि क्रिसमस के बारे में भारत में सभी जानते हैं पर शहीदी पूरब के बारे में लोगों को जानकारी ही नहीं है।

 

शहीदी पूरब पंजाब में 21 दिसंबर से 26 दिसंबर तक मनाया जाता है चार साहिबजादों की शहादत को श्रद्धांजलि देने के लिए।

साहिबज़ादे शब्द का अर्थ है – बेटा । चार साहिबजादे सिखों के दसवें गुरु श्री गोविंद सिंह जी के चार शहीद हुए बेटों को कहा जाता है।

21 दिसंबर 1705 को युवा साहिबज़ादे अजीत सिंह और जुझार सिंह, 18 और 14 वर्ष की उम्र में चमकौर की लड़ाई में शहीद हुए।

छोटा साहिबजादे, युवा जोड़ी को कहा जाता है – जोरावर सिंह और फतेह सिंह, जिन्हें 6 वर्ष और 9 वर्ष की छोटी आयु में एक साथ मुगलों द्वारा 26 दिसंबर 1705, को सरहिंद मे बड़ी़े निर्दयता से मार दिया गया था

चार साहिबजादों की शहादत सिख इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और हर साल सिख पूरे विश्व में 21 दिसंबर से 26 दिसंबर शहीदी पूरब मनाते हैं।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा के अथक प्रयासों के बाद NCERT के सचिव मेजर हर्ष कुमार ने जानकारी दी कि अगले सेशन से NCERT अपने सिलेबस में सिखों के दसवें गुरु श्री गोविंद सिंह के चार साहिबजादों की शहादत का इतिहास शामिल करने के लिए तैयार हो गई है। उम्मीद है आने वाले समय में देश के स्टूडेंट्स चार साहिबजादों की शहादत के बारे में पढ़ेंगे।

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